आँखें जो अब तक चुम्बक की तरह चिपकी थी ...हाथ जो फेविकोल के जोड़ की तरह जुड़े थे ...कान जो बाहरी शोरगुल को फ़िल्टर करके बस उसकी साँसों को सुन रहे थे ..अधर जिसपे अभी भी उसके लिपस्टिक की खुसबू थी ....मन में प्रेम, गुलाबी आँचल ओढ़े नाच रहा था .... अचानक उसके चंद शब्दों ने वज्रपात सा कर दिया मनःस्थिति पर .. " कल मेरे बेटे ने तुम्हारे बारे में पूछा था की ये अंकल कौन लगते हैं आपके , मम्मी.." ".........बताओ क्या जवाब दूँ उसको......?????"
लघुकथा अपने आप में एक सम्पूर्ण कथा होती है। इसे गागर में सागर कहें या फिर "देखन में छोटन लगे - घाव करे गंभीर " कहा जा सकता है।