सिमी वाश बेसिन के सामन लगे आदमकद आइने में मुँह धोने के बाद बड़े गौर से खुद को देख रही थी। दिन भर की भागदौड़ के बाद, शोर शराबे से दूर, शांत भाव से खुद को देखते हुए अप्रतिम आंनंद मिल रहा था उसे । उसे याद आया- "तुम्हारी आँखें कितनी गहरी हैं" यही कहा था हर्ष ने आज । फिर वो शरमा सी गयी। हाँ ऐसे ही तो ब्लश कर रही थी वो । शीशे में देखते हुए सोचने लगी । फिर जाने कहा से वो खडूस बॉस आ गया था । क्या कहा था उसने । हाँ यही कि योर परफारमेंस इज सो पुअर दैट....। कुत्ता साला । सीमी ने शीशे में देखा उसके चेहरे का भाव बदल गया था । उतेजना और क्रोध के मिश्रित भाव ने उसके चेहरे की आकृति बदल दी थी । अचानक खुद को देखते देखते उसे ये सोच हँसी आने लगी कि कितनी अजीबोगरीब लगती है वो गुस्से में । हँसते हँसते उसे अपना चेहरा और प्यारा लगने लगा । सिमी को हँसते हँसते कुछ और याद आने लगा । मैट्रो से आते समय फब्तियाँ कसते चेहरे । अब उसके चेहरे पर घृणा और क्रोध के मिश्रित भाव ने अपना रंग चढ़ा दिया था । उसने चेहरे पर एक बार फिर से पानी मारा । मुंह तौलिये से पोछते हुए उसने देखा कि अब चेहरा सपाट था । उसे लगा मानो सार...
लघुकथा अपने आप में एक सम्पूर्ण कथा होती है। इसे गागर में सागर कहें या फिर "देखन में छोटन लगे - घाव करे गंभीर " कहा जा सकता है।