" अरे सकलैन भाई कल अपनी बुलेट देना जरा ।" " काहे भैय्या " "अरे भाई वो हिन्दू वाहिनी की रैली में जाना है । " "हाहाहा तो गुप्ता तू दुकान बंद करके रैली में जायेगा ..." "भाई नेता जी से जान पहचान हो रही है, बुलेट से रैली में जाउँगा तो ...समझ न यार " "अच्छा ठीक है ले लेना भाई " कल शाम नोयडा में गुप्ता जी के दुकान पर गया था तो ये अद्भुत वार्तालाप सुनने को मिला । आज शायद गुप्ता जी सकलैन भाई के बुलेट से हिंदू युवा वाहिनी रैली में गये हों गे ।
लघुकथा अपने आप में एक सम्पूर्ण कथा होती है। इसे गागर में सागर कहें या फिर "देखन में छोटन लगे - घाव करे गंभीर " कहा जा सकता है।