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जून, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

बंटवारा

लड़ाई मंदिर के चढ़ावे को ले कर थी। बंटवारे के तहत गजानन पंडित जी को कार्तिकेय की मूर्ति का चढ़ावा मिला था जबकि उनके भाई कार्तिक पंडित जी को गणपति का चढ़ावा। अब कार्तिकेय भगवान की मूर्ति पर चढ़ावा कम था गणपति के मूर्ति से, तो बात बिगड़ गयी। यहाँ तक की पंडो के बीच हाथापायी की नौबत आ गयी। बड़े पंडित शिव कुमार जी ने इसका उपाय निकाला। अपने हिस्से के शिव और पार्वती की मूर्तियों को दोनों में बाँट दिया। माँ-बाप को अलग अलग बेटो के हिस्से में डाल दिया। अब शिव जी की मूर्ति कार्तिकेय की मूर्ति के साथ और माँ गौरी की मूर्ति गणपति की मूर्ति के साथ थी।  खैर चढ़ावा तकरीबन बराबर ही आने लगा था दोनों भाईयों को। तो सभी खुश थे इस  बंटवारे  से। 

अंतर्द्वंद

बंटी ने अपनी माँ को किसी तरह अपने शराबी बाप से पीटने से बचा लिया था आज। "कैसे झेल गयी मम्मी तुम इस इंसान को इतने साल ! " " बेटे यही सोच कर की शायद ये ठीक हो जाएँ ! "

पुनर्निर्माण

जमीं की जकड़न कम हो रही थी। उसे दुनिया से जोड़ने वाली जड़ें काटी जा रही थी। दुखों ने निष्ठुर बना दिया था जमीं को। अब उसे दुनिया के जीव पराये लगने लगे थे। फिर एक जलजला आया। सृष्टि की सारी रचना एक अवस्था में आ चुकी थी। एक विशाल दलदल की चादर फ़ैल गयी थी जमीन के ऊपर। जैसे अनेक धातुओं को पिघला कर एक साथ फैला दिया गया हो। किन्तु सारी रचनाओं को नष्ट कर सृष्टि नीरस हो चुकी थी। कुछ दिनों बाद दूर कही जमीं में हलचल हुयी। एक पौधा जमीन के सीने पर जनम ले रही थी। सृष्टि अपने पुनर्निर्माण में फिर से लग गयी थी।

आज फिर आई थी वो सपने में

आज फिर आई थी वो सपने में। पर काफी बदली बदली लग रही थी इस बार। चेहरा थोड़ा उदास लग रहा था। ना कुछ बोली, ना कुछ चेहरे के भाव बदली। "क्या हुआ तुम्हे ?" "कुछ नहीं। वो आजकल कितनी गर्मी बढ़ गयी है। रेड़ी वाले सड़को पर कैसे काम करते हैं ? रिक्शे वाले इस तपती दुपहरी में कैसे सवारी ढोते हैं। वो आइसक्रीम वाला छोटा सा बच्चा कैसे पसीने बहाते दोपहर में ठंढी आइसक्रीम बेचता है ? " अब मैं परेशान हो गया। "अरे तुम तो मेरी तरह सोचने लगी। पर कैसे ? पहले तो तुम्हे मेरी इन बातों से चिढ होती थी। " "वो क्या है ना। आजकल हम सपने में ही मिलते हैं ना। तो मैं भी तुम्हारे सपनो जैसे होती जा रही हूँ। तुम्हारी तरह ही सोचने लगी हूँ। 

ठुल्ला

"देखो जी मैं तो कहती हूँ रिश्ता पक्का कर लेना चाहिए। अब ट्रैफिक हवलदार है लड़का। सैलरी से कई गुना ज्यादा तो ऊपर की कमाई होगी। अरे कहाँ ध्यान है आपका?? कुछ बोल रही हूँ मैं आपसे... " " ओह्ह सॉरी। हाँ बोलो क्या बोल रही थी तुम ? " "छोड़ो ये सब। पहले ये बताओ आपको आने में आज देर कैसे हो गयी??" "वो रेड लाइट से गाडी निकाल रहा था कि "ठुल्ला" आ गया। अब खाली सड़क देख मैंने लाल बत्ती तोड़ भी दी तो क्या हुआ। पर वो स्साला "माम्मा" कंजर निकला। 500 भी ले गया और खाली पीली में टाइम भी बर्बाद कर  दिया। अच्छा छोडो इन बातों को वो क्या कह रही थी तुम ?" " कुछ नहीं जी...बाद में बात करते हैं। अभी आप थक गए होंगे। "

आत्म सम्मान

"सर, ये साहित्यिक सम्मान लेखक के तौर पर आपका करियर बना देगा। बस कुछ स्पोंसर्स दिलवा दीजिये इस समारोह के लिए। वैसे भी कॉर्पोरेट जगत में काफी पहचान है आपकी। " "रहने दीजिये मिश्रा जी, मेरा आत्म सम्मान किसी भी सम्मान से बड़ा है।"