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फ़रवरी, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

वो कुलदेवी को नमाज सुना रही थी

नयी बहु और बेटे संग अम्मा कुलदेवी की प्रतिमा के सामने खड़ी थी। "बेटी मत्था टेको यहाँ..ये कुलदेवी हैं हमारी.." "पर अम्मा ! नगमा तो मुसलमा..." "अरे हाँ, मैं तो भूल ही गयी। रहने दो बेटा... वाक्य पूरा भी नही कर पायी अम्मा... देखा नगमा तो दोनों हाथ जोड़ आँखें बंद किये कुलदेवी के सामने खड़ी है।  कुछ देर बाद नगमा ने आँखें खोली तो पतिदेव प्यार से पूछ बैठे  " क्या बुदुबुदा रही थी नगमा " " वो जी, मुझे आरती और पूजा तो आते नहीं तो मैं कुलदेवी को नमाज सुना रही थी " बड़ी मासूमियत से जवाब दिया नगमा ने।  अम्मा को लगा जैसे धर्मों के बीच की दीवार भरभरा गयी हो। दोनों को बाहों में भींचते हुए बोली " प्यार में सच में बड़ी ताकत है ।"

स्माल टाउन बॉयज

"डोसा यहीं खा लेते हैं .." "नहीं पैक करवा लेते हैं, घर में ही खायेगें ..जानती हो ना इ फोर्क-स्पून-नाइफ वाला सिस्टम में मजा नै आता है .." "उफ्फ.. ये स्माल टाउन बॉयज .."

नयका जमाना के जमींदार

"दद्दा जमीन बचावे खातिर दिल्ली जाय के है कल.. बड़का अनसन है हुआँ। " 90 साल के दद्दा पूछ बैठे.. "पर बबुआ दिल्ली में काहे ?"  "दद्दा नयका जमाना के जमींदार हुवें रहेला.."