गाँव में नया तालाब खुदा था। लोगों ने आरती की, पूजा किया, उत्सव मनाया। फिर एक दिन बाढ़ आ गयी। गाँव के बाहर बहने वाली नदी उछल उछल कर अपना विस्तार करने लगी। तालाब और नदी का पानी मिल गया। तालाब ने सोचा उसका विस्तार हो रहा है। नदी के आवेग से उसमे भी उफान आने लगा था। अब तालाब भी लोगों को भयभीत करने लगा था। पर कुछ दिनों बाद बाढ़ का पानी उतर गया। नदी तो यूँही बहे जा रही थी लेकिन तालाब में एक स्थिरता आ गयी थी। शायद उसे अपनी सीमा का एहसास हो चला था।
लघुकथा अपने आप में एक सम्पूर्ण कथा होती है। इसे गागर में सागर कहें या फिर "देखन में छोटन लगे - घाव करे गंभीर " कहा जा सकता है।