सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

अगस्त, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

बैकवार्ड

कोई बैकवार्ड ना समझ ले इसलिए दोस्तों के सामने माँ को "माॅम" बुला रहा था मोहित ।  तभी उसका पैर फिसला । गिरते गिरते चिल्ला उठा " आ गे मैय्या गे मैय्या " ।

खैरात

ये लेडीज सीट है, सुनते ही बैठे नवयुवक खड़े हो गये । एक युवती तो बैठ गयी लेकिन दूसरी खड़ी ही रही । "सुमी, अब बैठ भी जा " "मैं नहीं बैठ रही ।" "क्या हुआ तुझे ?" "यार लीव इट ना । वैसे भी खैरात की चीजें पसंद नहीं मुझे ।" "क्या खैरात ? ये हमारा हक है ।" "ये हक मुझे नहीं चाहिये, वैसे भी मैं किसी लड़के से कम हूँ क्या " "तू नहीं सुधरने वाली " दोनों के चेहरे पर मुस्कुराहट तैर गयी ।