कोई बैकवार्ड ना समझ ले इसलिए दोस्तों के सामने माँ को "माॅम" बुला रहा था मोहित । तभी उसका पैर फिसला । गिरते गिरते चिल्ला उठा " आ गे मैय्या गे मैय्या " ।
लघुकथा अपने आप में एक सम्पूर्ण कथा होती है। इसे गागर में सागर कहें या फिर "देखन में छोटन लगे - घाव करे गंभीर " कहा जा सकता है।