"आप भी समझते नहीं हैं , हर बात पे दोनों बाप बेटा लड़ लेते हैं। " "अरे मैं कहा लड़ता हूँ। मैं तो बस उससे कुछ देर बात करना चाहता हूँ। आखिर जिसके लिए अपनी पूरी जिंदगी लगा दी मैंने। उससे दो मिनट बात भी नहीं कर सकता।" "पर आप तो जानते हैं ना आजकल के बच्चे। माँ बाप का जरा सा भी हस्तक्षेप बर्दास्त नहीं कर पाते।" "बिट्टू की माँ याद है न, ऑफिस से थका हारा आता था फिर भी इसे रोज घुमाने ले जाता था शाम को।" "बिट्टू के पापा, एक बात कहूँ। बुरा तो नहीं मानोगे??" "बोलो " "याद है आप रोज बिट्टू को तो पार्क घुमाने ले जाते थे। पर बिट्टू के दादा जी सुबह से आपका इन्तेजार कर रहे होते थे, और आपके पास समय नहीं होता था उनसे बात करने का। मानती हूँ आप गलत नहीं थे इसलिए ये भी मानती हूँ की बिट्टू भी गलत नहीं। " "नहीं बिट्टू की माँ। मैं गलत था और शायद बिट्टू भी है।" दोनों खामोश थे अब।