सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

जुलाई, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

बुनियाद

"एक आखिरी सवाल, साधन का अभाव होते हुए भी आप इतने सफल हुए जीवन में ।  कोई एक वजह बता सकते हैं ? " " मेरी बुनियाद मजबूत थी " "समझा नहीं ?" "मेरी माँ, एक मजबूत महिला थी। "

श्रद्धा या सहूलियत

"देख यार उधर पैर करके नहीं सोते हैं। उधर भगवान की फोटो है।" "भगवान की फोटो तो तेरे लैपटॉप में भी है, फिर साले तू गन्दी वीडिओज़ क्यों देखता है ?" "यार, देख तू अपने अटपटे लॉजिक को मेरे श्रद्धा और विश्वास के बीच मत लाया कर।" "हाहाहा...श्रद्धा है या सहूलियत ? खैर जाने दे।"

रामपुर वाली

"ये कौन थी मम्मी ?" "रामपुर वाली काकी " "रामपुर वाली इनका नाम है ?" "नहीं बेटे रामपुर इनका मायका है इसलिए सब इन्हें रामपुर वाली बुलाते हैं " "पर इनका नाम क्या है मम्मा ??" "पता नहीं । अब छोड़ो भी, जाके होमवर्क करो।" सवाल तो टाल गई वो पर मन ही मन सोचने लगी "कैसे समझाउँ कि गाँव की औरतों के नाम नहीं होते... और शहरों में ही कौन सा होता है। वहाँ फलानपुर वाली और यहाँ मिसेज फलाना " मन दुखी होने लगा तो टीवी आॅन कर दी। न्यूज फ्लैश हो रहा था " सानिया मिर्जा ने भारत को टेनिस में दिलायी एक और सफलता " आँखों में चमक आ गयी, लगा जैसे बदलाव बहुत नजदीक है ।

आरक्षण

'कुछ शरम करो जी..तुम हमेशा फर्स्ट आते थे क्लास में..और राममनोहरा तो टाॅप टेन में भी नहीं आता था। पर आज उ बैंक मनेजर बने वाला है और तुम जुत्ता घिस रहे हो ।" "बाबू जी । उस इग्जाम में भी हम राममनोहर से ज्यादा नंबर लाये थे । " "तो निकला काहे नहीं जी इग्जाम ?" "जैसे की आप जानते ही नहीं । काश हम भी जनरल में ना पैदा होके एस सी एस टी में पैदा होते । " "क्या बोले ??" "कुछ नै बाबू जी । तैय्यारी करते हैं , इस बार पक्का निकाल लेंगे ।"

बरसात

दो दिन पहले ही गेटकीपर बोल रहा था " अब का बताएँ सर..गरमी इतनी है कि सो नहीं पाते हैं रात को.." मुझे याद आ गया बचपन में कहीं पढ़ा था " गरमी गरीबों की, सर्दी अमीरों का .." लगा जैसे शहरी गरीब की परिकल्पना ही नहीं की होगी लेखक ने उस समय। अब तो "गरमी और सर्दी दोनों ही अमीरों का है।" फिर मन में ख्याल आया बारिश हो जाए तो सब के लिए भला होगा। अमीरो का एयरकंडीशन का बिल बचेगा। और गरीब बेचारे सुकून से सो पाएंगे रात में। खैर आज बारिश भी हुयी जम के। गेटकीपर बाबू लाल को देखते ही मैं पूछ बैढा " क्यों बाबू भैय्या । आज तो सोये होंगे अच्छी तरह। बारिश ने तो काफी राहत दिला दी है।" बाबू थोड़ी बेबसी में थोड़ी सी उग्रता मिलाकर बोला "कहाँ सर । रात भर झुग्गी चू रही थी सो अलग उपर से सुबह तक घर में नाले का पानी घुस आया था।" अब मैं क्या बोलता। थोड़ी बहुत सांत्वना दे के कट लिया वहाँ से। मन व्यथित हो गया था । लगा जैसे गर्मी और सर्दी की तरह बरसात भी अमीरों के लिए ही बनायीं गयी हो।

आप भी समझते नहीं हैं , हर बात पे दोनों बाप बेटा लड़ लेते हैं

"आप भी समझते नहीं हैं , हर बात पे दोनों बाप बेटा लड़ लेते हैं। " "अरे मैं कहा लड़ता हूँ।  मैं तो बस उससे कुछ देर बात करना चाहता हूँ। आखिर जिसके लिए अपनी पूरी जिंदगी लगा दी मैंने।  उससे दो मिनट बात भी नहीं कर सकता।" "पर आप तो जानते हैं ना आजकल के बच्चे।  माँ बाप का जरा सा भी हस्तक्षेप बर्दास्त नहीं कर पाते।" "बिट्टू की माँ याद है न, ऑफिस से थका हारा आता था फिर भी इसे रोज घुमाने ले जाता था शाम को।" "बिट्टू के पापा, एक बात कहूँ। बुरा तो नहीं मानोगे??" "बोलो " "याद है आप रोज बिट्टू को तो पार्क घुमाने ले जाते थे।  पर बिट्टू के दादा जी सुबह से आपका इन्तेजार कर रहे होते थे, और आपके पास समय नहीं होता था उनसे बात करने का। मानती हूँ आप गलत नहीं थे इसलिए ये भी मानती हूँ की बिट्टू भी गलत नहीं। " "नहीं बिट्टू की माँ। मैं गलत था और शायद बिट्टू भी है।" दोनों खामोश थे अब। 

कैसी हो। मुद्दत बाद याद आई मेरी

"कैसी हो। मुद्दत बाद याद आई मेरी। " "मैं ठीक हूँ। सुनो। दरअसल वो कॉल मैंने इसलिए किया था की..." "हाँ, हाँ ! बोलो... वैसे भी तुम्हारे कॉल का इन्तेजार करते करते अब तो बाल भी सफ़ेद होने...." "वो मेरी और तुम्हारी एक पिक है फेसबुक पर। वो प्लीज डिलीट कर देना। " "हम्म.. ओके। " "और बताओ …" "मैं थोड़ा बिजी हूँ..बाई.. "

तुम बना रही हो और हम बन रहे हैं

"तुम बना रही हो और हम बन रहे हैं " झुंझला के वो बोला । "हाहाहा । आखिर हैं ही इतने स्मार्ट हम " अदा से वो बोली । "हुँह्ह । इसमें तुम्हारा स्मार्टनेस नहीं है...हमारा मन है बस.." अकड़ के वो बोला । "वो भला क्यूँ ?" मुस्कुराकर आँखों में आँखें डाल वो बोली । " क्यूँकी कमबख्त मेरा मन भी अब मेरा नहीं रहा ।" चेहरे का नकली बेबसी का भाव हौले हौले प्यार के गहरे भाव में बदल रहा था ।

Facebook @ Vyang - Part 3

"भाई किसी को क्या दिया मैंने ये मत सोच ...तू बता तुझे क्या चाहिये ??" "जो उसे मिला ..." बोल के उँगली उठा दी इंसान ने फेसबूक न्यूजफीड की तरफ । भगवान ने उस ओर देखा सैकड़ो अलग अलग टाइप के इंसानों के अपडेट आ रहे थे ।  अब भगवान भी कनफ्यूजिया गये । बोले " मुन्ना कोई एक चीज ले ले ! जैसे म्यूजिसियन बना देता हूँ या कार दिला देता हूँ या फारेन ट्रिप.. एक्सेट्रा, एक्सेट्रा !" "एक चीज से काम नहीं बनता प्रभु । कम से कम इतना तो दे दो कि टाईमलाईन अच्छी हो जाये ।" "स्ट्रगलर ही रहियो जिंदगी भर ..." बड़बड़ाते हुये भगवान आॅफलाइन हो गये !! इंसान ने सोचा शायद भगवान का फेक अकाउंट रहा होगा । 2 मिनट बाद फिर से वो लग गया लाइक्स और स्माइली चेपने में ...;) :D