शाम की किरणों ने अंदाजा लगाया था की रात की कहानी रोचक होगी। भोर होते ही किरणें दौड़ पड़ी उस ओर। खिड़की के अधखुले पल्ले से, परदे की ओट से निकल कर पहुंच गयी बिस्तर पर। बिस्तर की सिलवटें बता रही थी रात कुछ ख़्वाबों ने जन्म लिया है। फिर किरणें कुछ आगे बढ़ी। तकिया दिखा गीला सा। शायद कुछ खब्बों का क़त्ल भी हुआ था।
लघुकथा अपने आप में एक सम्पूर्ण कथा होती है। इसे गागर में सागर कहें या फिर "देखन में छोटन लगे - घाव करे गंभीर " कहा जा सकता है।