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एक दशक से जो जमा था पिघलने लगा था

विरह के दर्द और असह्य हो जाते जब उसे लगता की शायद एकतरफा ही प्यार किया है उसने। 10 साल से उसी के नाम पर रोया है बस ....यूँ तो कभी कभी उसकी गहरी आँखों में भी कुछ प्रेम नजर आता था किन्तु इससे बस इतना फायदा था की वो उसे कभी बेवफा नहीं कह सकता था। पर अचानक आज कई सालों के बात जब उससे मुलाकात हुई तो लगा की तपस्या पूर्ण हो गयी .. बातों बातों में उसने बता दिया की ... "वो भी उससे उतना ही प्रेम करती थी, जितना की वो उसको करता था" ...लेकिन उसके पति बहुत अच्छे हैं और एक क्यूट सा बच्चा भी है। अचानक ही उसके दिल में अजीब सी अकुलाहट आ गयी , शायद एक दशक से जो जमा था पिघलने लगा था।

रोजनामा

रात ,बिस्तर,ख्याल, सवाल, दिमाग, जवाब, दिल, उत्तर- निरुत्तर, तर्क- कुतर्क, उलझन, नींद, सपना और सुबह ...!!! (लघुतम कथा)

आखिर पंडित हैं हमलोग

"...लेकिन मम्मी मैं चार साल उसी के साथ हॉस्टल के एक ही रूम में रहा हूँ और एक ही थाली में खाया भी है ...और आप ये बात जानती हैं फिर अगर आज जब वो अपने घर आया है तो आप कह रही हैं की वो सबके साथ बैठ के नही खायेगा क्यूंकि वो मुस्लिम है ...!!! "देखो बेटा वो अच्छा लड़का है तुम्हारा अच्छा दोस्त भी है लेकिन तुम अपना धर्म भ्रष्ट कर लिए इसका ये मतलब नही हम भी अपना धर्म भूल जाएँ ...आखिर पंडित हैं हमलोग।
पहली नौकरी ...पहला दिन… प्रोजेक्ट मेनेजर  कोंफी  पीते पीते  कुछ समझा रहे थे ... "देखो अगर यहाँ टिक गये तो फ्यूचर बन जाएगा .... " अगले दिन सुबह सुबह एच आर का फ़ोन आया  …. "mr. kanchan  इज नो मोर.…कल एक दुर्घटना में मारे गये…" मेरे दिमाग में उनके फ्यूचर प्लानिंग वाली बात घुमने लगी।