विरह के दर्द और असह्य हो जाते जब उसे लगता की शायद एकतरफा ही प्यार किया है उसने। 10 साल से उसी के नाम पर रोया है बस ....यूँ तो कभी कभी उसकी गहरी आँखों में भी कुछ प्रेम नजर आता था किन्तु इससे बस इतना फायदा था की वो उसे कभी बेवफा नहीं कह सकता था। पर अचानक आज कई सालों के बात जब उससे मुलाकात हुई तो लगा की तपस्या पूर्ण हो गयी .. बातों बातों में उसने बता दिया की ... "वो भी उससे उतना ही प्रेम करती थी, जितना की वो उसको करता था" ...लेकिन उसके पति बहुत अच्छे हैं और एक क्यूट सा बच्चा भी है। अचानक ही उसके दिल में अजीब सी अकुलाहट आ गयी , शायद एक दशक से जो जमा था पिघलने लगा था।
लघुकथा अपने आप में एक सम्पूर्ण कथा होती है। इसे गागर में सागर कहें या फिर "देखन में छोटन लगे - घाव करे गंभीर " कहा जा सकता है।