डायरी नयी थी। सभी पन्ने सफ़ेद थे। अजीब सी गंध थी उस डायरी की। लेकिन सभी पन्नों में एक सी। फिर एक दिन डायरी के कुछ पन्नो पर स्याही बिखरने लगा। पलटते पन्नो के साथ ही शेष बचे श्वेत पन्ने इंतज़ार करने लगे उस स्याही का। पर लेखक ने आधी डायरी लिख कर छोड़ दिया लिखना। जाने क्या हुआ उसके साथ। आजकल रोज नए नए हाथो से डायरी के पन्ने पलटने लगे हैं । लेकिन सिर्फ वही जिनपे स्याही बिखरी है। सफ़ेद पन्नों को आज भी इंतजार है खुद की कहानी सुनाने का।
लघुकथा अपने आप में एक सम्पूर्ण कथा होती है। इसे गागर में सागर कहें या फिर "देखन में छोटन लगे - घाव करे गंभीर " कहा जा सकता है।