भैया जी दबंग ही नहीं थे ४ बार सांसद और दुइ बार मंत्री भी रह चुके थे। ऐसे तो भैया जी के लिए सब बराबर था। का हरिजन और का बामन। लेकिन ससुरा परमेशरा को तो अपना हरिजन का राजनीति करना था। तो भड़का दिया लोगन को " देखो अपना लोग ही समझ पायेगा हमरी पीड़ा को। पिछलग्गू बनना छोड़ के आगे लाओ अप्पन बिरादरी वाले को।" अब भैया जी को अपने हाथ से क्षेत्र और इज्जत दुनु निकलते दिख रहा था। तो ख़तम कर दिए ससुरा को। खुदे गोली मारे थे उहो दू बित्ता से मात्र। अब भैय्या जी को तो हो गयी जेल लेकिन विरासत सँभालने आ पहुंचा उनका विलायती बेटा। एकदम भैय्या जी का ट्रू कॉपी लगता है और दिमाग देखिये बबुआ का चुनाव परचार के लिए सबसे पाहिले परमेशरे के घर गया। ओकर बूढ़उ बाप के पैर धर के बोला" बाबूजी को फंसाया गया है अरे इ सब राजनीती है आप के बेटा को मरवा दिया और हम्मर बाप को फंसा दिया.. अब बाप जैसे हैं आप हम्मर...अब हमहि को परमेशर मानिये।"
अब जो बेचारा जिनगी भर अप्पन छाँही को भी छुपा लेता था अइसन बड़का लोगन से एकदम से पसीज गया।
"अरे कुंवर जी पाप न चढ़ाई हमके। हमर मन नहीं मानत है कि मालिक इ बूढ़ा के आँख छीन सकत हैं। लोग कुच्छो कहें। "
एक बार फिर से आसमान ऊपर था और धरती नीचे।