सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

सितंबर, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

बदबू

"हमारा पति पत्नी का रिश्ता भले ही ना टूटे पर तुम्हे मैं चूम नहीं सकती " खामोश निगाहों ने ऐसे देखा मानो पूछ रहा हो क्यों ... "क्यूंकि तुम्हे चूमते हुए मुझे लगता है तुम्हारे साँसों से उस चुड़ैल की बदबू आ रही है " खामोश निगाहों में कसैलापन के साथ साथ कुछ शर्मिंदगी भर गयी थी। 

क से कहानी

एक गरीब टाइप वृद्ध को अखबार पढ़ते देख लेखक का मन उद्वेलित हो गया । सोचने लगा पूछ लूँ कुछ इनसे, क्या पता कुछ कहानी ही हाथ लग जाये । "बाबा क्या पढ़ रहे अखबार में ?" "वही जो लिख्खा है इसमें " अनमने ढंग से जवाब आया । लेखक चुप हो गया सुन कर। सोचा अड़ियल है बुढ़ढा । कबर में पैर है, गरीबी की चादर तले बैठा है, लेकिन अकड़ नहीं जा रही । पर कोई नहीं ; फोटो ले लेता हूँ इसकी । दर्द भरी कहानी तो बहुत सी बन जाएगी । अब लेखक कहानी सोचने लगा " पुत्र द्वारा प्रताड़ित पिता...राजनीति के गिरते स्तर को देखता एक सच्चा समाजसेवी... "बंद हुए चीनी मिल" के संबंध में खबर पढ़ता हुआ एक वृद्ध जो इसके बंद होने से बेरोजगार हो गया था ...पेपर में अपना नाम और फोटो ढूंढ़ता वृद्ध... रोजगार वाले कॉलम में अपने बेटे के लिए नौकरी ढूंढता वृद्ध....ब्ला ब्ला ब्ला। तभी बुजुर्ग की आवाज आई : "का टकटकी लगाये हो.. पेपर पढ़ना है। ये लो। वैसे भी मोहल्ले में सब मुफ्त का ही पेपर पढता है। एक मेरा मनोहरवा ही गधा है जो पेपर खरीद कर पढता है।" लेखक साहब सन्न थे। दिमाग भनभना रहा था। पेपर हा...