" अरे मंगलसूत्र पायी है, हिन्दू ही है रे … " " अल्ला हु अकबर, अरे उठा ले छोरी ने … " " बहुत दिनों बाद आज … हे हे हे …" " अल्लाह दी सों जे कोई हत्थ लावे तो … ऐसा करो सारे जेवर उतार लो …" " पर जेवर तो नक्को है मुस्ताक भाई …. इन्नी मेहणत बेकार किवें जांण दूँ.… " गरीब लोगां की किस्मत ही ….. साली जेवर होता तो बच ना जाती …" " बची तो वैसे भी ना है भाई ....रे अनवर तुम लोगां ने जे करना है कर ल्यो …. लेकिन लाशां थोरी दूर फेंक्यो … मुस्ताक भाई ने बुरा लाग्यो है औरत जात दे नाल बदसलूकी …! "
लघुकथा अपने आप में एक सम्पूर्ण कथा होती है। इसे गागर में सागर कहें या फिर "देखन में छोटन लगे - घाव करे गंभीर " कहा जा सकता है।