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पिछला दरवाजा

एक घर था। घर में रहने वाला इंसान साधारण सा था।   उसी घर में पीछे एक दरवाजा था। घर की एक परम्परा थी , जिसके मुताबिक कोई उस पिछले दरवाजे को खोलने की कोशिश नहीं करता..एक बार किसी ने कोशिश की थी तो वो पागल हो गया था ! लेकिन आज अचानक उस इंसान ने वो दरवाजा खोल दिया..! अन्दर देख कर हैरान हो गया.! वहां अजीब सी सरांध थी , अजीब सी खूशबू भी ..अँधेरा भी था , आँखें चुन्धियाने वाला उजाला भी ...!फिर उसने देखा कुछ अजीब से जानवर थे ..गधे , कुत्ता , मगरमच्छ , भेड़िया , हिरन , शेर, भालू और चूहे   ..! वो हैरान हो गया ये देख कर की सारे जानवरों के चेहरे इंसानी थे..! अरे ये तो उसी के चेहरे हैं...ये देखते ही पसीने पसीने हो गया...जोर की प्यास लगने लगी उसे..! तभी दूर दिखा सूली पर लटका हुआ कोई ...बिलकुल ईशा की तरह लेकिन सर पे नमाजी टोपी , दाढ़ी गुरुओं की तरह बढ़ी हुयी ...अनेक हाथ थे ..किसी में त्रिशूल, किसी में शंख ! फिर अचानक उस अजीब सी प्रतिमा का मुह खुला ...धीरे धीरे सब उसमे सामने लगे...सारे जानवर , प्रकाश-अन्धकार ...सब कुछ उसके मुखद्वार में प्रवेश करने लगा ...इंसान को लगा जैसे की कोई ...