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मार्च, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

नजरें

"अपनी आँखे धो के आओ " "क्यों ?" "क्योंकि तुम्हारी आखों पर मेरी नजरें चिपक रही हैं ..."  ;)   :) # लप्रेक

टेप्रेक - टेलिकाॅम प्रेम कथा

"मैं तेरा वोडाफोन और तू मेरी आईडिया " "ज्यादा रोमांटिक न बनो । मुझे तुम्हारे हच के बारे में भी पता है ..." # टेप्रेक  - टेलिकाॅम_प्रेम_कथा

होलिका दहन

होलिका दहन का आयोजन हो रहा था। पंडित जी सब को बता रहे थे कि कैसे होलिका ने प्रयास किया प्रह्लाद को जलाने का लेकिन वो बच गया था और होलिका ही जल गयी। सुनते ही यसोदा ठहाके लगा के हँसने लगी। " अब तू क्यों बच्चों की तरह हँस रही है ताई " पास खड़ा रवि ने आश्चर्य से यसोदा को देखा। " कुछ नहीं बिटवा, पुरानी बात याद आ गयी " " कौन सी पुरानी बात ताई। हमें भी तो बताओ " " अरे बात तेरे जनम से भी पहले की है। मेरे सास यानी तेरे दादी ने दहेज़ को लेके एक दिन मुझे जलाने की कोशिश की। मिटटी तेल डाल के माचिस लगा दिया। लेकिन जाने कैसे आग मेरे से पहले उसके हाथ में लग गयी। " कहते कहते एक पल के लिए कहीं खो सी गयी ताई। अगले ही पल फिर कहने लगी : " तो बबुआ जब भी ये होलिका वाली बात सुनती हूँ तो बुड्ढी का चेहरा याद आ जाता है और हँसी निकल ही जाती है। " रवि अवाक सा ताई की तरफ देख रहा था। " फिर क्या हुआ ताई... " "फिर झुमका गिरा बरेली के बाजार में.... फिर कुछ नहीं हुआ, जा अपना काम कर ।" कह के ताई हँसने लगी। रवि झेंप गया। सोचने लगा ताई ने...