जाने माने प्रोफेसर मुकुंद जी मुस्कुराते हुए अपनी छात्रा की बात सुन रहे थे : "सर आप तो बिलकुल छा गए हैं। क्या जबरदस्त तथ्यपरक निबंध लिखा था आपने नारी शशक्तिकरण पर। आपकी लघुकथाएं भी जब्बरदस्त होती है जब आप नारी के शोषण और उनपर हो रहे अत्याचार को केंद्रित करते हुए लिखते हो। मैं तो फैन हो गयी हूँ आपकी। आखिर आप इतना मार्मिक कैसे लिख लेते हैं??" "इन्हे अत्याचार करने का बहुत अनुभव है.... " टेबल पर चाय रखते हुए उनकी श्रीमती जी ने बुदबुदाया। जो शायद इतनी धीमी थी कि कोई सुन नहीं पाया।
लघुकथा अपने आप में एक सम्पूर्ण कथा होती है। इसे गागर में सागर कहें या फिर "देखन में छोटन लगे - घाव करे गंभीर " कहा जा सकता है।