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इन्हे अत्याचार करने का बहुत अनुभव है

जाने माने प्रोफेसर मुकुंद जी मुस्कुराते हुए अपनी छात्रा की बात सुन रहे थे : "सर आप तो बिलकुल छा गए हैं। क्या जबरदस्त तथ्यपरक निबंध लिखा था आपने नारी शशक्तिकरण पर। आपकी लघुकथाएं भी जब्बरदस्त होती है जब आप नारी के शोषण और उनपर हो रहे अत्याचार को केंद्रित करते हुए लिखते हो। मैं तो फैन हो गयी हूँ आपकी। आखिर आप इतना मार्मिक कैसे लिख लेते हैं??" "इन्हे अत्याचार करने का बहुत अनुभव है.... " टेबल पर चाय रखते हुए उनकी श्रीमती जी ने बुदबुदाया। जो शायद इतनी धीमी थी कि कोई सुन नहीं पाया।

"खुरदरे हाथ"

"पिताजी ने बहुत किया है हम बच्चों के लिये। गरीबी में भी पढ़ा लिखा के दोनों भाइयों को ऑफिसर बना दिया। अब पिताजी को देख के कोई कह नहीं सकता कि एक समय वो खादान में मजदूरी करते थे ।" भावुक हो रहे पतिदेव को पत्नी ने टोका : "बट यू नो डार्लिंग, बुरा मत मानना लेकिना पापा को बोलो कि पार्टी में हाथ ना मिलाया करे लोगों से। कितने घिनौने खुरदरे से हाथ हैं। " पति चुप रह गया। जानता था बड़े घर की नखरैल घमंडी बीबी को समझाने जायेगा तो झगड़ा ही होगा । लेकिन दबी जुबान में बोल गया : "डियर तुम नहीं समझोगी । बच्चों कें हाथ हमेशा कोमल और सुंदर रहे इसलिये ही तो पिताजी के हाथ खुरदरे रह गये ।"