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मई, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

अंतहीन इंतजार

"ये रोज यहाँ स्टेशन पर आते हैं । बिलकुल उसी समय पर जब ट्रेन आती है ।बात क्या है गंगाधर ? " नये स्टेशन मास्टर ने चाय वाले से पूछा । "कोइ नहीं है बाबा का.. बेटा था एक । शहर गया पर लौट के ना आया । बेटे के आने की उम्मीद ही है जो सालों से रोज खिंच लाती है उन्हें ।" " पर उनके बेटे को हुआ क्या ?" " अब का जानें सरकार, शहर निगल गया शायद ! हरिया बता रहा था कि शहर में रोज लावारिश लाशें मिलती....।" पूरा बोल नहीं पाया गंगूआ । अगले दिन से स्टेशन मास्टर बाबा को रोज अंदर बुला लेते अपने केबिन में । अब तो काफी अपनापन सा हो गया था उनके बीच । एक दिन कुछ इधर उधर की बातों के बाद वो बाबा से बोले " बाबा कब तक इंतजार करते रहेंगे। निराश नहीं करना चाहता आपको लेकिन बाबा कुछ परिंदे लौट के कभी नहीं आते ।" बाबा मुस्कुराये । एक गहरी सांस लेकर बोले " बेटा सब को लगता है मैं अपने बेटे की आस में यहाँ आता हूँ । लेकिन सच तो ये है कि वो आस तो कब की टूट गयी । अब तो बस आदत हो गयी है आने वाले मुसाफिर को देख कर खुश होने की । ऐसा लगता है मानो कलेजे को ठंढक सी मिल ग...

ये तरकीब उस दिन से अब तक काम आती है मेरे

"सुनो ! एक बात पूछूँ। " "पूछो "  "तुम्हें हमारी कौन सी बात सबसे ज्यादा याद है?"  "हम जब पहली बार मिले थे। कितने शर्मा रहे थे तुम। वैसे तुम्हे कौन सी बात याद है ?" "अपनी आखिरी मुलाकात। मेरे हाथों से अपना हाथ खींच लिया था तुमने हौले से। जाते जाते भी तीन चार बार पलटी थी तुम। " "हाँ ! और तुम अजीब से मुस्कुरा रहे थे। पहली बार वैसी मुस्कराहट दिखी थी तुम्हारे चेहरे पर। " "ठीक वैसे ही ना जैसे आजकल मुस्कुराता हूँ ? " "हाहाहा....।" हंस पड़ी वो। " तुम्हारे गम को छुपाने के लिए ये तरकीब उस दिन से अब तक काम आती है मेरे। " बोलना चाहता था पर बोल नहीं पाया ।

पहला बुद्ध

इंसान पशुता की गहरी खायी लांघ होमोसेपियन्स बनने के कगार पर था। अब उसने समझना शुरू किया था एक निश्चित अंतराल लगभग 70-80 साल का ही समय है उसके पास। फिर उसने दौड़ लगनी शुरू की समय के साथ। पर वो थकता, गिरता और संभालता लेकिन समय तो एक निश्चित वेग में भाग रहा था। कई पीढ़ी इंसानों की ऐसे ही समय आगे बेबस हो कर विदा हो गयी इस दुनिया से। फिर अचानक एक इंसान ने समय के साथ इस दौड़ को ध्यान से देखने की कोशिश की। गहरे ध्यान में उसने पाया की समय तो वही है दौड़ तो इंसान रहा है बस। बस उस दिन से उसके पास समय ही समय था। शायद पहला बुद्ध था वो अनाम इंसान।