"अबे इतनी शराब पिलायी है। अब तो बोलो वोट भैया जी को ही दोगे ना " अब वो बेचारा टुल्ल हो गया था... तो सच्चाई उगल बैठा "अरे शराब ही तो पिलाया है कौन सा हमने तुम्हारा नमक खाया है जो वोट ना दिए तो नमक हराम हो जायेंगे।" "साले तुम्हारी नियत जानता था। तभी शराब के साथ चखना भी है वो भी नमकीन। अब तो नमक खाया है। अब तो वोट दोगे ना भैय्या जी को " "मान गये भैया जी के साथ रहते रहते तुम भी पक्के नेता हो गये हो। अब तो वोट देना ही पड़ेगा नेता जी को। भाई नमक खाया है उनका "
लघुकथा अपने आप में एक सम्पूर्ण कथा होती है। इसे गागर में सागर कहें या फिर "देखन में छोटन लगे - घाव करे गंभीर " कहा जा सकता है।