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दिसंबर, 2013 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

भाई नमक खाया है !

"अबे इतनी शराब पिलायी है। अब तो बोलो वोट भैया जी को ही दोगे ना " अब वो बेचारा टुल्ल हो गया था... तो सच्चाई उगल बैठा "अरे शराब ही तो पिलाया है कौन सा हमने तुम्हारा नमक खाया है जो वोट ना दिए तो नमक हराम हो जायेंगे।" "साले तुम्हारी नियत जानता था। तभी शराब के साथ चखना भी है वो भी नमकीन। अब तो नमक खाया है। अब तो वोट दोगे ना भैय्या जी को " "मान गये भैया जी के साथ रहते रहते तुम भी पक्के नेता हो गये हो। अब तो वोट देना ही पड़ेगा नेता जी को। भाई नमक खाया है उनका " 

नन ऑफ़ योर बिज़नस

"देखो मुझे तुमसे प्यार नही है और ना ही था, तुम इतने गिल्टी कनसस मत होओ .."  "लेकिन ये आंसू ??" "नन ऑफ़ योर बिज़नस ...और तुम समझ भी नही सकते..!!"

इस कंटेंट को बेचा कैसे जाए

साहेब बेहद संजीदगी और अपनेपन से मिल रहे थे  दंगा पीड़ितों से। लोग भी भावुक हो कर रो रो कर बता रहे थे अपने दर्द को। बताएं भी क्यूँ नही इतना बड़ा आदमी उनके बीच कहाँ आता है। पूरे दिन झुग्गियों में भटकने के बाद जब  रात को साहेब अपनी बी एम डब्ल्यू  में अपने बंगले  कि तरफ प्रस्थान कर रहे थे तो एक ही बात उनके दिमाग में घूम रही थी -"हर एंगल से देख लिया, काफी कंटेंट जमा कर लिया है बस अब ये सोचना है कि इस कंटेंट को  बेचा कैसे जाए.।"