उन औरतों के अदम्य साहस और क्षमता को एक दिशा देकर नक्सली क्रांति की पट्टी पढाई गयी थी। जुल्म की दास्ताँ कानों में भर भर कर खड़ा किया गया था तथाकथित मुख्यधारा के खिलाफ। अगणित साथियों के क्षत- विक्षत लाश और बलात्कार से नुचे जिस्मों को देख भी विचलित नहीं हुयी थी वो अपनी राह से।
लेकिन आज जाने क्या था उन गाँव की छोरियों के नाच में। रंग - बिरंगी तितली की भांति लहराती, बाहों में बाहें डाल डोलती लड़कियों को देख कर मन के कोने मे कुछ पिघलने लगा था। कंधे पर टंगे राइफल और गोलियों का भार अब असह्य सा लगने लगा था।
सुबह अख़बार के मुख्य पृष्ठ पर कुछ नक्सलियों के आत्मसमर्पण की खबर थी।
लेकिन आज जाने क्या था उन गाँव की छोरियों के नाच में। रंग - बिरंगी तितली की भांति लहराती, बाहों में बाहें डाल डोलती लड़कियों को देख कर मन के कोने मे कुछ पिघलने लगा था। कंधे पर टंगे राइफल और गोलियों का भार अब असह्य सा लगने लगा था।
सुबह अख़बार के मुख्य पृष्ठ पर कुछ नक्सलियों के आत्मसमर्पण की खबर थी।
