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फेक प्रोफाइल

दो दिन से एक अजीब से अकाउंट से मेसेज आ रहा रहा था। मेसेज नहीं पढ़ा मैंने बस नाम देखा। एंजेल लव ऐसा ही कुछ नाम था। अरे इसी अकाउंट से तो फ्रेंड रिक्वेस्ट भी आया था.. मैं बुदबुदाया 
" साले लोगों को क्या हो गया है। नाम लिखने में शर्म आती है। जरूर किसी लौंडे का फेक प्रोफाइल होगा। यार पता नहीं क्या मजा आता है लोगों को इसमें "
कुछ देर बाद एक फ़ोन आया 
"अबे सुमि ने तुम्हारा नंबर माँगा है। कॉल किया था उसने या नहीं ? बोल रही थी एफ बी पर तो जवाब ही नहीं देता है । अबे रिप्लाई कर दियो और हाँ एंजेल लव के नाम से प्रोफाइल है उसका "
अचानक ही एक मुस्कान तैर गयी चेहरे पर

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मूर्तिकार

मूर्तिकार की व्यस्तता बता रही थी की दुर्गा पूजा काफी नजदीक आ चुकी है। महिषासुर और माता की अनेकों मूर्तियाँ विभिन्न आकर और रूपों में पड़ी थी। लेकिन एक मूर्ति कुछ ज्यादा ही भव्य बनके उभर रही थी। मूर्तिकार भी इधर उधर मिटटी चढ़ा के उसे और सुन्दर बनाने में लगा था। बीच बीच में आत्म मुग्ध होकर काफी देर तक निहारता भी रहता उस मूर्ति को।  रात हो चुकी थी। दिन भर के थकान को भूल अपनी ही धुन में लगा पड़ा था। जाने कब नींद आ गयी उसे। अचानक सपने में उसे वही मूर्ति मुस्कुराती नजर आई। सम्मोहित सा  खड़ा रहा वो। मूर्ति की मुस्कान और भी गहरी हो गयी। एक विचित्र सी आभा फैलने लगी चहुओर। घंटियों और शंखों की आवाज आने लगी ,अगरबत्ती और धूप का धुंआ जैसे फ़ैल गया था। फिर अचानक एक सैलाब आया पानी का। वो मूर्ती अब डूब रही थी, उसके रंग पानी में घुलने लगे थे। घंटियों और शंखों की आवाज और तेज़ हो गयी थी। देखते ही देखते मूर्ती गायब हो गयी। मूर्तिकार सपने में रोने लगा। फिर उसे लगा कोई उसके आंसू पोछ रहा है। गौर से देखा , अरे ये तो माँ है....जगत जननी नहीं बल्कि उसकी जननी।

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" आज -कल वो गुरु-शिष्य परंपरा नहीं रही "- कहते हुए डॉ रमनन ने सिगरेट सुलगाई ... अब छात्रों से वो इज्जत कहा मिलती है teachers को ....! '' Sir Time has changed ..अब छात्र विद्या अर्जन करने नहीं बल्कि खरीदने आते हैं " " Yes Mohit - खैर मुझे क्या करना है इन बातों का .....Forget those things ...अब ये teachers का जो खम्भा बचा है उसे भी तो ख़तम करना है .... " मोहित आज्ञाकारी छात्र की तरह तन्मयता से गुरु आज्ञा पालन में लग गया ........