" इतनी कड़वे-कसैले क्यूँ हो नीम कि तरह। बसंत तो वृद्धों में भी यौवन ला देता है और तुम युवा होके भी हर मौसम पतझड़ सा महसूस करते हो।"
"जानते हो कोई फल अगर मौसम से पहले पक जाए तो फिर मीठा नहीं हो पाता है। खट्टा ही रहता है।"
"ओह्ह तो फिर से वही पुरानी घिसी पिटी प्रेम कहानी। अरे मान क्यूँ नहीं लेते वो बचपना था तुम्हारा। अरे तुम तो बादशाह ए चमन हो सकते हो और उलझे हो एक कली में। "
"जानते हो जब भूख शांत हो जाती है तो छप्पन भोग भी आकर्षित नहीं कर पाता है। और ये तो रूहानी भूख है। इसे सिर्फ वही शांत कर सकता है जो … रहने दो तुम नहीं समझ सकते "
"जानते हो कोई फल अगर मौसम से पहले पक जाए तो फिर मीठा नहीं हो पाता है। खट्टा ही रहता है।"
"ओह्ह तो फिर से वही पुरानी घिसी पिटी प्रेम कहानी। अरे मान क्यूँ नहीं लेते वो बचपना था तुम्हारा। अरे तुम तो बादशाह ए चमन हो सकते हो और उलझे हो एक कली में। "
"जानते हो जब भूख शांत हो जाती है तो छप्पन भोग भी आकर्षित नहीं कर पाता है। और ये तो रूहानी भूख है। इसे सिर्फ वही शांत कर सकता है जो … रहने दो तुम नहीं समझ सकते "
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