"सुना है आजकल कोई आ गयी है तुम्हारी जिंदगी में। सच में क्या ?"
उसके इस प्रश्न मे जिज्ञासा कम और कटाक्ष अधिक लगी मुझे।
"तो क्या करता। कब तक तुम्हारा इन्तेजार करता। और वैसे भी अब तो तुम किसी और की परिणीता हो। तुम्हे क्यों ये सब जानना है ?"
मुस्कुरा कर जवाब देने कि कोशिश कि मैने। लेकिन चेहरे पर वेदना की हलकी सी उभरी रेखा को देख लिय था उसने।
कुछ क्षण के लिये दोनो मौन थे। फिर उसने हौले से पूछा
" अच्छा उसके साथ भी गंगा के किनारे नरम घास पर घंटो बैठ लहरो को निहारते हो, साँझ ढले चुपके से छत पर आ के घंटो आसमां के रंगीन झिलमिल तारों मे खो जाते हो। उसके संग भी...."
अब एक कटु मुस्कान आ गयी थी मेरे चेहरे पर
" ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह। ये सब उसे पसंद नही। उसे तो मॉल में, मल्टीप्लेक्स मे और डिस्क मे ही मेरे साथ टाइम स्पेंड करने मे मज़ा आता है। "
"और तुम्हे ?????"
अब मैं निशब्द था। मौन ने फिर से आँचल पसार लिया था।
उसके इस प्रश्न मे जिज्ञासा कम और कटाक्ष अधिक लगी मुझे।
"तो क्या करता। कब तक तुम्हारा इन्तेजार करता। और वैसे भी अब तो तुम किसी और की परिणीता हो। तुम्हे क्यों ये सब जानना है ?"
मुस्कुरा कर जवाब देने कि कोशिश कि मैने। लेकिन चेहरे पर वेदना की हलकी सी उभरी रेखा को देख लिय था उसने।
कुछ क्षण के लिये दोनो मौन थे। फिर उसने हौले से पूछा
" अच्छा उसके साथ भी गंगा के किनारे नरम घास पर घंटो बैठ लहरो को निहारते हो, साँझ ढले चुपके से छत पर आ के घंटो आसमां के रंगीन झिलमिल तारों मे खो जाते हो। उसके संग भी...."
अब एक कटु मुस्कान आ गयी थी मेरे चेहरे पर
" ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह। ये सब उसे पसंद नही। उसे तो मॉल में, मल्टीप्लेक्स मे और डिस्क मे ही मेरे साथ टाइम स्पेंड करने मे मज़ा आता है। "
"और तुम्हे ?????"
अब मैं निशब्द था। मौन ने फिर से आँचल पसार लिया था।
