" अच्छा अगर नहीं चाहते हो मुझे तो क्यों आते हो रोज़ मेरे पास ?"
नया पेग बनाते हुए वो बोला :
" तुम इस शराब की तरह हो। मैं शराब से नफरत करता हूँ। लेकिन इसे छोड़ नहीं सकता। लत लग गयी है इसकी मुझे। "
"अच्छा जानते हो मैं क्यों नही रोकती तुम्हे आने से ???"
"क्यूँ ??"
"क्यूंकि मैं भी तुम्हे शराब की तरह ही मानती हूँ। पर गटक सिर्फ इसलिए रही हूँ ताकि इस नशे में किसी और का नशा भुला सकूँ। "
दोनों की कहकहे की आवाज गूँज उठी।
नया पेग बनाते हुए वो बोला :
" तुम इस शराब की तरह हो। मैं शराब से नफरत करता हूँ। लेकिन इसे छोड़ नहीं सकता। लत लग गयी है इसकी मुझे। "
"अच्छा जानते हो मैं क्यों नही रोकती तुम्हे आने से ???"
"क्यूँ ??"
"क्यूंकि मैं भी तुम्हे शराब की तरह ही मानती हूँ। पर गटक सिर्फ इसलिए रही हूँ ताकि इस नशे में किसी और का नशा भुला सकूँ। "
दोनों की कहकहे की आवाज गूँज उठी।