पसीने की बूँद कान के ऊपरी हिस्से से होते हुए गर्दन के नीचे फिसल रही थी। धूल की एक हलकी परत जम गयी थी चेहरे पर। घर आते ही बंद हो गया बाथरूम में। शावर से निकले पानी में धूल, पसीने की बदबू में लिपटा कुछ अरमान, दर्द के साथ बहने लगा। फ्रेश होकर बैडरूम में आया। सामने दीवार पर टंगे पोस्टर में लिखा चमक रहा था...
"कर्मण्ये वाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन् । "
"कर्मण्ये वाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन् । "
