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खैरात

ये लेडीज सीट है, सुनते ही बैठे नवयुवक खड़े हो गये । एक युवती तो बैठ गयी लेकिन दूसरी खड़ी ही रही ।
"सुमी, अब बैठ भी जा "
"मैं नहीं बैठ रही ।"
"क्या हुआ तुझे ?"
"यार लीव इट ना । वैसे भी खैरात की चीजें पसंद नहीं मुझे ।"
"क्या खैरात ? ये हमारा हक है ।"
"ये हक मुझे नहीं चाहिये, वैसे भी मैं किसी लड़के से कम हूँ क्या "
"तू नहीं सुधरने वाली "
दोनों के चेहरे पर मुस्कुराहट तैर गयी ।