नयी बहु और बेटे संग अम्मा कुलदेवी की प्रतिमा के सामने खड़ी थी।
"बेटी मत्था टेको यहाँ..ये कुलदेवी हैं हमारी.."
"पर अम्मा ! नगमा तो मुसलमा..."
"अरे हाँ, मैं तो भूल ही गयी। रहने दो बेटा...
वाक्य पूरा भी नही कर पायी अम्मा... देखा नगमा तो दोनों हाथ जोड़ आँखें बंद किये कुलदेवी के सामने खड़ी है।
कुछ देर बाद नगमा ने आँखें खोली तो पतिदेव प्यार से पूछ बैठे
" क्या बुदुबुदा रही थी नगमा "
" वो जी, मुझे आरती और पूजा तो आते नहीं तो मैं कुलदेवी को नमाज सुना रही थी " बड़ी मासूमियत से जवाब दिया नगमा ने। अम्मा को लगा जैसे धर्मों के बीच की दीवार भरभरा गयी हो। दोनों को बाहों में भींचते हुए बोली " प्यार में सच में बड़ी ताकत है ।"
