आज फिर आई थी वो सपने में। पर काफी बदली बदली लग रही थी इस बार। चेहरा थोड़ा उदास लग रहा था। ना कुछ बोली, ना कुछ चेहरे के भाव बदली।"क्या हुआ तुम्हे ?"
"कुछ नहीं। वो आजकल कितनी गर्मी बढ़ गयी है। रेड़ी वाले सड़को पर कैसे काम करते हैं ? रिक्शे वाले इस तपती दुपहरी में कैसे सवारी ढोते हैं। वो आइसक्रीम वाला छोटा सा बच्चा कैसे पसीने बहाते दोपहर में ठंढी आइसक्रीम बेचता है ? "
अब मैं परेशान हो गया।
"अरे तुम तो मेरी तरह सोचने लगी। पर कैसे ? पहले तो तुम्हे मेरी इन बातों से चिढ होती थी। "
"वो क्या है ना। आजकल हम सपने में ही मिलते हैं ना। तो मैं भी तुम्हारे सपनो जैसे होती जा रही हूँ। तुम्हारी तरह ही सोचने लगी हूँ।