दालान पर कुछ लोग आये थे , शायद छोटे चाचा के विवाह के सन्दर्भ में ....घर के बड़े बुजुर्ग सेवा सत्कार में लगे थे ....तभी घर का एक छोटा बच्चा जाने किधर से आया और आते ही सबके पैर छूने लगा ....बाबा ने बताया था की कोई भी दरवाजे पर आये तो पैर छूना चाहिए ...
"अरे कितना संस्कारी बच्चा है ...."इतनी छोटी उमर में इतना संस्कार ......
बच्चा मन ही मन प्रफ्फुलित हो चला था .....तभी मझले चाचा ने उसे घर के अन्दर से बुलाया ....बच्चा भगा भगा पहुंचा ....मन अभी भी बाहर हुए प्रशंशा से आह्लादित था ....की तभी चाचा ने देखते ही उसके कान पर एक थप्पड़ जर दिया ...और घर की महिलाओं के सामने उसे डांटते हुए कहा ...."एकदम संस्कार हीन हो गया है .....पंडित का बच्चा होके मल्लाह का पैर छूता है .....
बच्चा रोते हुए समझने की कोशिश कर रहा था की ....शायद बाहर आये लोगों में से कोई मल्लाह भी था .....और ब्रह्मण का बच्चा होके .........
बच्चा अब बड़ा हो गया है लेकिन बचपन का वो थप्पड़ अभी भी उसके मन में कहीं न कहीं अंकित है ........!!!
