चिंट ने मारा चींटी को और गंगा जी में डाल दिया।गंगा का रंग काला हो गया।कौवा ने देखा, तो पानी पीना छोड़ के उड़ गया।जंगल के बाकी जानवर भी आये पानी पीने के लिए लेकिन सब ने देखा की पानी का रंग तो अचानक काला हो गया है, तो उन्होंने ने भी पीना छोड़ दिया।अब ये खबर जंगल में आग की तरह फ़ैल गयी की अचानक नदी का पानी काला कैसे हो गया। खबर जंगल में शेर के मांद से लेकर चूहे के चाय की दूकान तक फ़ैल गयी। अब वो चिंट जो ये मानकर चल रहा था की हमेशा की तरह मामला दब जाएगा, ये सोचकर मरा जा रहा है मेरे ही समय पर इस गंगा के पानी को भी काला होना था। क्रमशः .......
" आज -कल वो गुरु-शिष्य परंपरा नहीं रही "- कहते हुए डॉ रमनन ने सिगरेट सुलगाई ... अब छात्रों से वो इज्जत कहा मिलती है teachers को ....! '' Sir Time has changed ..अब छात्र विद्या अर्जन करने नहीं बल्कि खरीदने आते हैं " " Yes Mohit - खैर मुझे क्या करना है इन बातों का .....Forget those things ...अब ये teachers का जो खम्भा बचा है उसे भी तो ख़तम करना है .... " मोहित आज्ञाकारी छात्र की तरह तन्मयता से गुरु आज्ञा पालन में लग गया ........
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