"अब हम इस रिश्ते को यहीं खत्म करते हैं""क्यों ? कोई और मिल गई क्या ?"
"नहीं । बस अब आत्मग्लानि सी होती है "
"मेरे साथ सोने में तो नहीं हुई थी तुम्हें "
"बकवास मत करो "
"ओह ! तो उस बकवास का क्या..जो करके तुमने मुझे बरबाद कर दिया ।"
"वो प्यार था मेरा ।"
"तो वही कह रही मैं भी कि अब प्यार कहाँ गया "
"तुमने अपने पति से क्यों मिलवाया मुझे?"
"ये मेरे सवाल का जबाव नहीं है "
"अगर ना मिलवाती तो मुझे उससे दोस्ती न होती । और अब वो दोस्त है तो मैं उसके साथ गद्दारी नहीं कर सकता "
"तुम बात गोल गोल मत घुमाओ । मैं बस इतना जानती हूँ कि मेरा पति मेरे उपर समाज की थोपी गलती है और मैं बस तुमसे प्यार करती हूँ ।"
"सुनो अगर मुझसे प्यार करती हो तो एक मदद करोगी "
"हम्म्म् "
"रिश्ते को रीओरगेनाइज करते हैं । हम तुम दोस्ती निभाते हैं और पति से तुम प्यार वाला रिश्ता निभा लो ।"
"काश ये इतना आसान होता जैसे तुमने कह दिया। सी ऐ बाबू ये रिश्ते हैं आपका बैलेंस शीट नहीं। दोस्ती से प्यार तक तो पहुचना आसान है लेकिन अपने प्यार संग दोस्ती निभाना बहुत मुश्किल। और वैसे भी मेरी गणित कमजोर है। तो चलो, अलविदा।"