गोदान संपन्न हो चुका था। महापात्र दान में मिली गाय को लेकर यजमान के घर से थोड़ी दूर आ गए थे। वही पर उन्होंने उस्मान को बुलाया था। दान में मिली गाय को सही दाम में बेचकर महापात्र स्वस्थान लौट गए। उधर उस्मान भी गाय को लेकर अपने घर लौट गया था। कुछ दिन बाद बीफ के लिए हुए विवाद में कई गाँव सम्प्रदयायिक दंगे की चपेट में था। केशरिया झंडे के साथ महापात्र का बेटा और हरे झंडे के साथ उस्मान का बेटा भी दंगाईयों में शामिल था।
गोदान संपन्न हो चुका था। महापात्र दान में मिली गाय को लेकर यजमान के घर से थोड़ी दूर आ गए थे। वही पर उन्होंने उस्मान को बुलाया था। दान में मिली गाय को सही दाम में बेचकर महापात्र स्वस्थान लौट गए। उधर उस्मान भी गाय को लेकर अपने घर लौट गया था। कुछ दिन बाद बीफ के लिए हुए विवाद में कई गाँव सम्प्रदयायिक दंगे की चपेट में था। केशरिया झंडे के साथ महापात्र का बेटा और हरे झंडे के साथ उस्मान का बेटा भी दंगाईयों में शामिल था।

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