बीच आँगन में लाश रखा गया है । सब बिन्नी को हौसला दे रहे हैं । आखिर उसके पिता के देहांत के बाद इसी चाचा ने आसरा दिया था उसे और उसकी माँ को।
लेकिन बिन्नी बिलकुल खामोश है , कही अतीत में खोई हुई।
"अरे बेटी क्या हुआ भैया नही रहे तो ,मुझे अपना पापा समझो .."
कहते कहते सीने से लगा लिया था। एक अजीब सा अपनापन लगा था उसे ।लेकिन समय के साथ साथ ये आशीष भरा आलिंगन चुभने लगा था।चाचा का इधर उधर स्पर्श करना उस समय तो नही लेकिन बड़ी होने पर समझने लगी थी बिन्नी।
आज सामने उसी चाचा की लाश है और अजीब सी उलझन में है बिन्नी ।
समझ नही पा रही है की समाज द्वारा देवता घोषित चाचा के लाश पर फूट फूट कर रोये या फिर इस घिनौने पापी के लाश को खींच कर एक थप्पड़ दे।
लेकिन बिन्नी बिलकुल खामोश है , कही अतीत में खोई हुई।
"अरे बेटी क्या हुआ भैया नही रहे तो ,मुझे अपना पापा समझो .."
कहते कहते सीने से लगा लिया था। एक अजीब सा अपनापन लगा था उसे ।लेकिन समय के साथ साथ ये आशीष भरा आलिंगन चुभने लगा था।चाचा का इधर उधर स्पर्श करना उस समय तो नही लेकिन बड़ी होने पर समझने लगी थी बिन्नी।
आज सामने उसी चाचा की लाश है और अजीब सी उलझन में है बिन्नी ।
समझ नही पा रही है की समाज द्वारा देवता घोषित चाचा के लाश पर फूट फूट कर रोये या फिर इस घिनौने पापी के लाश को खींच कर एक थप्पड़ दे।
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