4 महीने ही तो बचे हैं नौकरी के.. वैसे भी ६० के होने वाले है.. जिंदगी में सब कुछ मिला, घर परिवार , सम्मानित नौकरी स्कूल हेडमास्टर की…. बस चिंता है एकलौता बेटे की, कहीं नौकरी मिल जाती तो भविष्य बन जाता , वैसे भी चैन से तभी मर सकता हूँ जब लगेगा की उसका भविष्य सुरक्षित है ...
सुना है अगर नौकरी में रहते मर जाऊ तो अनुकम्पा पर नौकरी मिल जाती है बेटे को...इससे अच्छी मौत क्या हो सकती है....वैसे भी जीते तो हम अपने बच्चों के लिए ही हैं...
सुना है अगर नौकरी में रहते मर जाऊ तो अनुकम्पा पर नौकरी मिल जाती है बेटे को...इससे अच्छी मौत क्या हो सकती है....वैसे भी जीते तो हम अपने बच्चों के लिए ही हैं...
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