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जब जब बदली घिर जाती है

"अरे क्या कर रही हो भींग जाओगी ..."
"आओ न तुम भी..."
"अरे नहीं नहीं भींग जाऊंगा.. खुद तो बीमार पडोगी मुझे भी बीमार कर दोगी.."
"कितने डरते हो तुम अच्छा एक मिनट हाथ देना मैं भी ऊपर आ जाऊ ..."
"ये लो अरे खींच क्यूँ रही हो  ओहो  ये क्या किया तुमने देखो भींग गया मैं भी .."
"हाहाहा तो क्या क्या हुआ वैसे भी कागज़ के तो हो नहीं ..वैसे सच बताओ लग रहा है न अच्छा ? "
ह्म्म्म… मैंने सर हिला  दिया एक मुस्कान के साथ और कस  के भींच लिया उसे अपनी बाहों में ।

सालों बीत गये इस बात के लेकिन आज भी जब जब बदली घिर जाती है , बारिश की पहली बूँद जब कभी मेरे तन छू जाती है तो एक पगली सी लड़की की याद मुझे आ जाती है.। 

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